जयपुर। शहर की पहचान सिर्फ उसकी ऐतिहासिक इमारतों और बाजारों से नहीं, बल्कि उनके खास रंगों से भी जुड़ी है। लेकिन अब यही पहचान धीरे-धीरे बदलती नजर आ रही है। परकोटे की कई इमारतों पर पारंपरिक ‘जयपुरी गुलाबी’ रंग की जगह अलग-अलग शेड दिखाई देने लगे हैं, वहीं एमआई रोड का पीला रंग भी कई हिस्सों में फीका पड़ता नजर आ रहा है।
अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक शहर की पुरानी इमारतों के रंग-रूप को लेकर नियम होने के बावजूद कई जगह मनमाने तरीके से पेंट और रंगों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे गुलाबी शहर की एकरूपता प्रभावित हो रही है।
सिर्फ रंग नहीं, विरासत का सवाल
जयपुर की पहचान उसके परकोटे और ऐतिहासिक भवनों के एक जैसे रंग-रूप से बनी है। ऐसे में किसी इमारत पर अलग रंग चढ़ने का असर केवल उस भवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे हेरिटेज लुक पर पड़ता है।
रिपोर्ट में विशेषज्ञों और जानकारों की ओर से भी इस बदलाव को लेकर चिंता जताई गई है। सवाल यह है कि जब शहर की ऐतिहासिक पहचान बचाने के लिए नियम और दिशा-निर्देश मौजूद हैं, तो उनके पालन की निगरानी कितनी गंभीरता से हो रही है?
एमआई रोड भी बदल रहा अपना रंग
एमआई रोड को भी लंबे समय से उसकी विशिष्ट रंग योजना के लिए पहचाना जाता रहा है। लेकिन समय के साथ कई भवनों के बाहरी हिस्सों में अलग-अलग रंग और डिजाइन नजर आने लगे हैं। इससे सड़क की पुरानी पहचान कमजोर पड़ने की चिंता सामने आई है।
नियम हैं तो निगरानी कौन करेगा?
जयपुर को हेरिटेज सिटी के रूप में मिली पहचान के बीच सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि ऐतिहासिक क्षेत्रों में भवनों के रंग और स्वरूप को लेकर बनाए गए नियमों की निगरानी कौन कर रहा है।
शहर के विकास के साथ नई जरूरतें जरूरी हैं, लेकिन इसके साथ जयपुर की ऐतिहासिक पहचान को बचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अब जरूरत केवल नए रंग तय करने की नहीं, बल्कि पुराने ‘गुलाबी शहर’ की पहचान को जमीन पर बनाए रखने की है।
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