पाल से लेकर ऐतिहासिक छतरियों तक संवरेगा परिसर, ड्रेनेज सिस्टम और गेस्ट हाउस पर भी होगा काम
अलवर। कभी आसपास के गांवों की सिंचाई जरूरतों का सहारा रहा अलवर का ऐतिहासिक जयसमंद बांध अब नए रूप में नजर आएगा। लंबे समय से रखरखाव की जरूरत महसूस कर रहे बांध और उसके परिसर के विकास के लिए करीब 4 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी योजना के तहत होने वाले इन कार्यों में बांध की पाल को मजबूत करने के साथ परिसर को पर्यटन की दृष्टि से बेहतर बनाने पर भी जोर रहेगा।
योजना के तहत बांध की पाल की पिचिंग को दुरुस्त किया जाएगा। डाउन स्ट्रीम क्षेत्र में पानी की निकासी को व्यवस्थित करने के लिए ड्रेनेज सिस्टम विकसित होगा। मिट्टी से जुड़े जरूरी काम भी कराए जाएंगे। पाल पर बनी ऐतिहासिक छतरियों की मरम्मत और रंग-रोगन के साथ आसपास की झाड़ियों और अनावश्यक पेड़-पौधों को हटाकर परिसर को साफ-सुथरा किया जाएगा।
बांध की पाल पर बने गेस्ट हाउस की मरम्मत और रंग-रोगन भी प्रस्तावित है। इससे पूरे परिसर को व्यवस्थित और आकर्षक स्वरूप देने की योजना है।
यूआईटी और जिला परिषद देंगी राशि
विकास कार्यों के लिए अलवर यूआईटी 2 करोड़ 25 लाख रुपए और जिला परिषद 1 करोड़ 75 लाख रुपए देगी। कार्यकारी एजेंसी जल संसाधन विभाग को बनाया गया है। प्रस्तावित कार्यों को मंजूरी मिल चुकी है। फिलहाल प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति की प्रक्रिया जारी है। स्वीकृतियां मिलने के बाद टेंडर जारी किए जाएंगे और फिर काम शुरू होगा।
पहले भी हुआ था सौंदर्यीकरण
जयसमंद बांध की पाल का पहले भी कायाकल्प कराया गया था। इसके बाद यहां लोगों की आवाजाही बढ़ी, लेकिन नियमित देखरेख के अभाव में लगाए गए पेड़-पौधे सूख गए और परिसर की रौनक कम होती गई। आज भी बांध पर लोग पहुंचते हैं और इसकी छतरियां युवाओं के लिए फोटो व सेल्फी का आकर्षण बनी हुई हैं।
1910 में बना था जयसमंद
जयसमंद बांध का निर्माण तत्कालीन महाराजा जयसिंह ने 1910 में कराया था। तेज बारिश के कारण 1917 में बांध टूट गया, जिसे 1924 में दोबारा तैयार किया गया। परिसर में करीब 14 छतरियां हैं। वर्ष 1977 में यहां गेस्ट हाउस बनाया गया था। इस मानसून में बांध में पानी नहीं आने से यह फिलहाल सूखा पड़ा है।
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