महाराष्ट्र के सोलापुर से निकलकर राजस्थान पुलिस तक पहुंचे IPS शरण कांबले की कहानी संघर्ष, मेहनत और बड़े सपने की मिसाल है। जिस घर में कभी बिजली तक नहीं थी, उसी घर के बेटे ने लालटेन की रोशनी में पढ़ाई की और आज पुलिस अधिकारी बनकर अपराध के खिलाफ मोर्चा संभाल रहा है।
शरण कांबले का जन्म 30 सितंबर 1993 को हुआ। उनके पिता परिवार का खर्च चलाने के लिए गटर खोदने का काम करते थे, जबकि मां खेतों से सब्जियां लाकर बेचती थीं। आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि पढ़ाई के साथ शरण भी मां के काम में हाथ बंटाते थे।
📚 पढ़ाई को बनाया हथियार
सरकारी स्कूल से पढ़ाई करते हुए शरण ने दसवीं में 95 और बारहवीं में 91 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद वालचंद कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, सांगली से BTech किया और करीब 9.5 CGPA हासिल किया। आगे IISc बेंगलुरु से MTech की पढ़ाई पूरी की।
💼 20 लाख की नौकरी ठुकराई
MTech के बाद उनके सामने करीब 20 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरी का अवसर था। लेकिन उन्होंने नौकरी के बजाय UPSC की तैयारी करने का फैसला किया। मेहनत रंग लाई और सिविल सेवा परीक्षा 2020 में 542वीं रैंक हासिल कर IPS के लिए चयनित हुए।
👮♂️ नशे के खिलाफ कार्रवाई
राजस्थान कैडर मिलने के बाद अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालते हुए उन्होंने सांचोर में ड्रग्स और NDPS मामलों के खिलाफ अभियान चलाया। नशे के खिलाफ कार्रवाई और जागरूकता के लिए उन्हें DGP Disc से सम्मानित भी किया गया।
🛡️ अब साइबर अपराधियों पर शिकंजा
वर्तमान में शरण कांबले डीग जिले के SP हैं। साइबर ठगी के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई में फर्जी बैंक खाते, सिम, ATM और मोबाइल नेटवर्क से जुड़े मामलों पर फोकस किया जा रहा है। ‘ऑपरेशन काउंटडाउन’ के तहत बड़ी संख्या में संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
🌟 संघर्ष से सेवा तक
शरण कांबले की कहानी बताती है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, शिक्षा और लगातार मेहनत इंसान की दिशा बदल सकती है। लालटेन की रोशनी में पढ़ने वाला एक बच्चा आज कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहा है। उनकी यात्रा उन युवाओं के लिए संदेश है कि संसाधनों की कमी सपनों को रोक सकती है, लेकिन मेहनत करने का फैसला इंसान के अपने हाथ में होता है।
Leave a comment