राजस्थान की नगरीय राजनीति में भाजपा ने नगर निगमों के स्तर पर अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराई है। जयपुर, कोटा और जोधपुर में महापौर पद के चुनाव के साथ प्रदेश के 10 नगर निगमों की तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है। अब इनमें से 9 नगर निगमों की कमान भाजपा के महापौरों के हाथ में होगी, जबकि सिर्फ बीकानेर में कांग्रेस का महापौर है।
शुक्रवार को जयपुर, कोटा और जोधपुर में महापौर पद के लिए मतदान हुआ। तीनों जगह भाजपा उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। जयपुर में सुनील कोठारी महापौर चुने गए। वहीं कोटा में अनुसुईया गोस्वामी और जोधपुर में प्रसन्न मेहता ने महापौर पद हासिल किया।
इन तीनों नगर निगमों में भाजपा के पास पहले से ही बहुमत था। इसी वजह से महापौर चुनाव में भी पार्टी के उम्मीदवारों की जीत हुई। मतदान सुबह 10 बजे शुरू हुआ और दोपहर 2 बजे तक तीनों निगमों के परिणाम सामने आ गए।
सात निगमों में पहले ही बन चुकी थी भाजपा की बढ़त
राजस्थान के सात अन्य नगर निगमों में महापौर का चुनाव इससे पहले हो चुका था। वहां भी भाजपा के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। अब जयपुर, कोटा और जोधपुर के नतीजे आने के बाद राज्य के सभी 10 नगर निगमों की तस्वीर स्पष्ट हो गई है।
नतीजों के मुताबिक भाजपा के पास जयपुर, कोटा, जोधपुर समेत कुल 9 नगर निगमों की मेयर सीटें हैं। बीकानेर एकमात्र ऐसा नगर निगम है, जहां कांग्रेस का महापौर बना है।
309 निकायों में भी भाजपा की बड़ी मौजूदगी
नगर निगमों के अलावा प्रदेश के दूसरे नगरीय निकायों में भी भाजपा की स्थिति मजबूत रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राजस्थान के 309 नगरीय निकायों में भाजपा के पास 203 सीटें हैं।
जयपुर में सुनील कोठारी की जीत के साथ राजधानी नगर निगम में भी भाजपा का बोर्ड कायम हो गया है। कोटा और जोधपुर के परिणामों ने भी प्रदेश के बड़े शहरों में भाजपा की स्थिति को स्पष्ट कर दिया है।
अब आने वाले समय में इन नगर निगमों में नए महापौरों के सामने शहरों से जुड़े विकास, सफाई, यातायात, सड़कों और अन्य स्थानीय मुद्दों पर काम करने की जिम्मेदारी होगी। नगर निगम चुनाव के बाद अब राजनीतिक नजरें पंचायत चुनाव की तैयारियों पर भी टिक गई हैं।
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