राजस्थान यूनिवर्सिटी में नई शिक्षा व्यवस्था के तहत ग्रेजुएशन के चौथे साल की शुरुआत होने जा रही है। चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम में चौथे वर्ष में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को रिसर्च के साथ डिग्री हासिल करने का मौका मिलेगा।
विश्वविद्यालय की ओर से तय व्यवस्था के अनुसार चौथे वर्ष में प्रवेश के लिए विद्यार्थियों को न्यूनतम 15 छात्रों का होना जरूरी होगा। इससे कम संख्या होने पर संबंधित विषय का सातवां सेमेस्टर शुरू नहीं किया जाएगा।
चौथे वर्ष में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को शोध आधारित पाठ्यक्रम से जोड़ा जाएगा। इसके तहत उन्हें रिसर्च प्रोजेक्ट और संबंधित अकादमिक कार्य पूरे करने होंगे। रिसर्च पूरी करने के बाद विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की जाएगी।
15 से कम छात्र हुए तो सातवां सेमेस्टर नहीं
विश्वविद्यालय स्तर पर हुई चर्चा में यह व्यवस्था सामने आई है कि किसी विषय में चौथे वर्ष के लिए 15 से कम विद्यार्थी उपलब्ध होने पर सातवें सेमेस्टर की शुरुआत नहीं होगी। वहीं, पर्याप्त संख्या होने पर विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई और रिसर्च का अवसर मिलेगा।
नई व्यवस्था के तहत स्नातक शिक्षा को तीन साल के पारंपरिक ढांचे से आगे बढ़ाकर चार वर्षीय मॉडल में लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और शोध के लिए बेहतर आधार उपलब्ध कराना है।
शोध के साथ डिग्री का विकल्प
चौथे वर्ष में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को रिसर्च आधारित अकादमिक अनुभव मिलेगा। इससे आगे पीजी और शोध के क्षेत्र में जाने वाले विद्यार्थियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
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