जयपुर। गुलाबी शहर की पहचान अब सिर्फ खूबसूरत इमारतों और बाजारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी ऐतिहासिक विरासत को बचाने का सवाल भी सामने आ गया है। जयपुर की चारदीवारी क्षेत्र में लगातार हो रहे बदलाव और अनधिकृत निर्माण को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने गंभीरता दिखाई है।
हाईकोर्ट ने जयपुर की ऐतिहासिक पहचान और यूनेस्को विश्व धरोहर दर्जे के संरक्षण को लेकर स्वतः संज्ञान लिया है। अदालत ने राज्य सरकार समेत 10 संबंधित विभागों और प्राधिकरणों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
मामले में जेडीए और जयपुर नगर निगम ग्रेटर व हेरिटेज को चारदीवारी क्षेत्र में हुए अनधिकृत और अनियंत्रित निर्माण का सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं। इसकी रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी।
अदालत ने यह भी जानना चाहा है कि पिछले कुछ वर्षों में विरासत क्षेत्र में हुए निर्माणों को किस आधार पर मंजूरी दी गई और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
दिसंबर की डेडलाइन पर नजर
जयपुर की चारदीवारी को वर्ष 2019 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिला था। अब हाईकोर्ट ने चिंता जताई है कि अगर समय रहते प्रभावी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो इस अंतरराष्ट्रीय पहचान पर गंभीर असर पड़ सकता है।
अदालत ने संबंधित विभागों से विरासत संरक्षण, निर्माण नियंत्रण, बफर जोन, ऊंचाई सीमा और पुराने भवनों की सुरक्षा को लेकर भी जानकारी मांगी है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले को जनहित याचिका के तौर पर दर्ज किया है। सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मिला है और अगली सुनवाई 26 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।
जयपुर की पहचान माने जाने वाले परकोटे, हवेलियों, बाजारों और ऐतिहासिक इमारतों को आने वाले समय में किस तरह संरक्षित किया जाएगा, अब इस पर हाईकोर्ट की सुनवाई पर नजर रहेगी।
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