जयपुर में साइबर अपराधियों ने सरकारी जांच और गिरफ्तारी का डर दिखाकर एक बुजुर्ग दंपती से दो करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम ठग ली। आरोपियों ने करीब 20 दिनों तक दंपती को वीडियो कॉल से जोड़े रखा। इस दौरान उन्हें अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के नाम लेकर कार्रवाई का भय दिखाया गया। मामले की जांच आगे बढ़ी तो ठगी के तार बीकानेर से जुड़े मिले। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
17 अगस्त को आया था पहला फोन
पुलिस के मुताबिक, 17 अगस्त को दंपती के पास एक कॉल पहुंचा। कॉल करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और दंपती के खिलाफ वारंट होने की जानकारी दी। इसके बाद उन्हें वीडियो कॉल पर दूसरे लोगों से बात कराई गई। इन लोगों ने खुद को पुलिस, आतंकवाद रोधी दस्ते, राष्ट्रीय जांच एजेंसी और रिजर्व बैंक से जुड़ा अधिकारी बताया।
दंपती को कथित तौर पर बताया गया कि उनके बैंक खातों में संदिग्ध लेन-देन हुआ है और उनका नाम आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन उपलब्ध कराने वाले लोगों से जोड़ा जा रहा है। कार्रवाई और गिरफ्तारी का डर दिखाकर उन्हें लगातार निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया।
बैंक खातों में जमा कराई रकम
पुलिस जांच के अनुसार, साइबर ठगों ने दंपती को करीब 20 दिनों तक मानसिक दबाव में रखा। उन्हें वीडियो कॉल से जुड़े रहने के निर्देश दिए गए और अलग-अलग बैंक खातों में पैसे भेजने को कहा गया। इसी प्रक्रिया में दंपती से दो करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम ट्रांसफर कराई गई।
आरोपियों ने अपनी पहचान और कहानी को वास्तविक दिखाने के लिए वॉट्सऐप पर कई दस्तावेज भी भेजे। इनमें सरकारी विभागों से जुड़े कागजात, बैंकिंग रिकॉर्ड और कथित आधिकारिक दस्तावेज शामिल थे। सरकारी नाम और मुहरों का इस्तेमाल कर दंपती को भरोसा दिलाने की कोशिश की गई कि उनके खिलाफ वास्तव में जांच चल रही है।
ऐसे खुला बीकानेर का कनेक्शन
ठगी की शिकायत के बाद पुलिस ने रकम के लेन-देन वाले बैंक खातों की जांच शुरू की। इसी दौरान बीकानेर निवासी राजूराम उर्फ राजेश और रतनाराम के बैंक खातों की जानकारी सामने आई।
पुलिस के मुताबिक, राजूराम ने अपना बैंक खाता, चेकबुक और एटीएम कार्ड उपलब्ध कराया था। उसके खाते में पहुंचे 1.50 लाख रुपये निकालकर सुनील नाम के व्यक्ति को देने की बात जांच में सामने आई। इसके बदले राजूराम को 15 हजार रुपये कमीशन मिलने का आरोप है।
दूसरे आरोपी रतनाराम के खाते से 24 सितंबर को दो चेक के जरिए 8.10 लाख रुपये निकाले गए। पुलिस के अनुसार यह रकम भी आगे पहुंचाई गई और इसके बदले आरोपी को 7,500 रुपये कमीशन मिला।
अब पूरे नेटवर्क की तलाश
दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब इस साइबर गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि बुजुर्ग दंपती से हासिल रकम किन-किन खातों में पहुंची और इस पूरी ठगी में कितने लोग शामिल हैं।
साइबर अपराध का यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि ठग किस तरह पुलिस और दूसरी सरकारी एजेंसियों का नाम लेकर लोगों में डर पैदा कर रहे हैं। किसी भी व्यक्ति को फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा जाए तो तत्काल संबंधित पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए।
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